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गुरुवार, 5 जुलाई 2007

आबलापा कोई इस दश्त में आया होगा - मीना कुमारी

मीना कुमारी 'नाज़' नाम किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है. हिन्दुस्तान की इस हसीन अदाकारा ने अपनी बेमिसाल अदायगी के दम पर लोगों के दिल में जो जगह बनायी, वो बहुत कम लोगों को नसीब होती है. मगर इनका अपना जीवन बहुत खुशगवार नहीं रहा. शायद इस मुसलसल दर्द की शिद्दत ने ही इस पाकीज़ा रूह को 'ट्रैजेडी क्वीन' का खिताब दिलाया. मगर उनकी शायरी बहुत लंबे समय तक लोगों के सामने न आ सकी. शायरी में भी 'नाज़' उसी दर्द को जीती हैं जो उनकी ज़िन्दगी का हिस्सा बन चुका था.

उनकी एक गज़ल यहाँ पेश कर रहा हूँ. मुझे यकीन है कि यह आप लोगों को भी उतनी ही पसंद आयेगी जितनी मुझे है:

आबलापा कोई इस दश्त में आया होगा
वरना आँधी में दिया किसने जलाया होगा

ज़र्रे ज़र्रे पे जड़े होंगे कुँआरे सिज़दे
एक-इक बुत खुदा उसने बनाया होगा

प्यास जलाते हुये काँटों की बुझायी होगी
रिसते पानी को हथेली पे सजाया होगा

मिल गया होगा अगर कोई सुनहरी पत्थर
अपना टूटा हुआ दिल याद तो आया होगा

खून के छींटे कहीं पूछ न लें रहरौ से
किस ने वीराने को गुलज़ार बनाया होगा

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