Searching...
शनिवार, 17 नवंबर 2007
no image

वो जो छुप जाते थे काबों में, सनमखानों में

आज कई रोज़ के बाद आपसे मुखातिब हूँ. पिछली बार हमने पढ़ी थी अठारहवीं सदी के अहमतरीन शायर 'सौदा' की एक खूबसूरत गज़ल. ‘सौदा’ साहब के बाद आ...

 
Back to top!