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रविवार, 23 मार्च 2008
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सोमनाथ : धार्मिक- विद्वेष के खिलाफ़ क़ैफ़ी की आवाज़

होली की मस्ती के बाद, आइये एक बार फिर लौटते हैं क़ैफ़ी साहब की ज़िन्दगी और शायरी और ज़िन्दगी के अफ़साने की ओर. मुंबई पहुँचने के बाद क़ैफ़ी साहब न...

शुक्रवार, 21 मार्च 2008
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होली के रंग

होली के पर्व की यह विशेषता है कि यह हर व्यक्ति को अपने में समेट लेता है और उसे कुछ समय के लिये दुनिया के हर ग़म और चिंता से दूर एक आनंद-लोक म...

रविवार, 16 मार्च 2008
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औरत : आज सोचा तो आँसू भर आये (क़ैफ़ी आज़मी)

सुल्तानुलमदारिस में दाखिल होने के कुछ अर्से बाद ही कैफ़ी साहब ने वहाँ के छात्रों की एक कमेटी गठित की और अपनी कुछ माँगे व्यवस्था-समिति के सामन...

रविवार, 9 मार्च 2008
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दोशीज़: मालिन (कैफ़ी साहब की एक खूबसूरत नज़्म)

इस सिलसिले के पिछले लेख में हमने कैफ़ी साहब की शायद सबसे पुरानी गज़ल पढ़ी जिसे बेगम अख्तर साहिबा ने अपनी आवाज़ दी है. आज बात करते हैं कैफ़ी साहब ...

रविवार, 2 मार्च 2008
कैफ़ी साहब की पहली गज़ल : इतना तो ज़िन्दगी में किसी की खलल पड़े

कैफ़ी साहब की पहली गज़ल : इतना तो ज़िन्दगी में किसी की खलल पड़े

कैफ़ी आज़मी का नाम हिन्दुस्तान के आलातरीन शायरों में शुमार किया जाता है. उत्तरप्रदेश के आज़मगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव में सन १९१९ में जन्मे कै...

 
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